उत्तर प्रदेशबाँदा

25 दिन से धरने पर डटे किसान, चकबंदी में भ्रष्टाचार के आरोपों पर तेज हुआ आंदोलन

बांदा में चकबंदी में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दो गांवों के किसान 25 दिनों से धरने पर हैं। नौ दिन आमरण अनशन के बाद भी कार्रवाई न होने से आंदोलन तेज हो गया।

Banda Farmers Protest: चकबंदी प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में बांदा के दो गांवों के किसान पिछले 25 दिनों से धरने पर बैठे हैं। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रभावशाली लोगों से मिलीभगत कर नियमों की अनदेखी करते हुए खेतों का आवंटन किया। लंबे आंदोलन के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से किसानों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

चकबंदी पर बवाल

मामला पैलानी तहसील के अमलीकौर और लोहरा गांव का है। किसानों का कहना है कि चकबंदी के दौरान पैसे लेकर कुछ लोगों के खेत सड़क किनारे कर दिए गए, जबकि अन्य किसानों के साथ अन्याय हुआ। इसी के विरोध में किसान शहर स्थित कचहरी परिसर के अशोक स्तंभ के नीचे लगातार धरना दे रहे हैं।
आंदोलन के दौरान कुछ किसानों ने नौ दिनों तक आमरण अनशन भी किया, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया। बीच में जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश किसानों से बातचीत करने पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और अनशन समाप्त करने से इनकार कर दिया।

राजनीतिक समर्थन मिला

शुक्रवार को आंदोलन को नया राजनीतिक समर्थन भी मिला। पूर्व राज्यसभा सांसद और समाजवादी पार्टी के महासचिव विषम्भर निषाद धरना स्थल पहुंचे और किसानों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और उनकी मांगों को लेकर हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि जब तक चकबंदी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

रिपोर्ट- अभिषेक शुक्ला

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